'करो या मरो' के तर्ज पर लड़ेंगे: नवादा में राकेश टिकैत का बड़ा ऐलान

बिहार के नवादा जिले में किसानों और प्रशासन के बीच संघर्ष की आग सुलग उठी है। मोतनाजे और मधुबन गांव के सैकड़ों एकड़ किसानों की जमीन छीनने के विरोध में गुरुवार को एक विशाल किसान महापंचायत का आयोजन किया गया। इस महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश सिंह टिकैत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
राकेश टिकैत ने गिरियक से स्वयं ट्रैक्टर चलाकर एक विशाल जुलूस का नेतृत्व किया और सभा स्थल पर पहुंचे। वहां किसानों ने हल और पालो के साथ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान किसान नेता दिनेश कुमार, अशोक प्रसाद सिंह और पूर्व विधायक मो. कामरान को भी सम्मानित किया गया।
भूमि अधिग्रहण कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं
महापंचायत को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मोतनाजे और मधुबन में गंगा जलाशय और टूरिस्ट प्लेस बनाने के नाम पर दशकों से बसे गांवों और खेतों को उजाड़ने की साजिश रची जा रही है। टिकैत ने कहा:
"यहाँ न तो लाठीचार्ज हुआ, न ही आंसू गैस के गोले फूटे, तो क्या आपने जमीन दान में दे दी? भूमि अधिग्रहण कानून 2013 की जिला प्रशासन द्वारा धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बिना सोशल ऑडिट और 70 प्रतिशत किसानों की सहमति के, जबरन जमीन छीनी जा रही है।"
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि फर्जी सोशल ऑडिट के नाम पर ठेकेदारों की मदद की जा रही है और इस बरसात के मौसम में खेतों में लहलहाती धान की फसलों को बुलडोजर से रौंद दिया गया है।
विनाशकारी विकास हमें मंजूर नहीं
किसानों के आक्रोश को देखते हुए महापंचायत में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि किसान अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे। टिकैत ने किसानों का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि यह देश का लोकतंत्र है और किसान अपनी अंतिम सांस तक लड़ेंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों को ऐसा विकास नहीं चाहिए जो उनकी खेती और गांव को तबाह कर दे। उन्होंने कहा कि:
- हमें खनन या पर्यटन के नाम पर विनाशकारी विकास नहीं चाहिए।
- हमें वह विकास चाहिए जो हमारी जवानी, पानी और किसानी को सुरक्षित रखे।
- पानी का बाजारीकरण नहीं, बल्कि उसका सामुदायिकरण होना चाहिए।
26 नवंबर को पटना घेराव की चेतावनी
किसान नेता दिनेश सिंह ने कहा कि आज बिहार के हजारों गांवों की जल, जंगल और जमीन पर कॉर्पोरेट घरानों की गिद्ध दृष्टि पड़ गई है। वहीं, अशोक सिंह ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार को न तो पर्यावरण की चिंता है और न ही गरीबों की।
महापंचायत के अंत में किसानों ने आंदोलन को और तेज करने का संकल्प लिया। किसान नेताओं ने आह्वान किया कि आगामी 26 नवंबर को लाखों की संख्या में पटना का घेराव किया जाएगा। इस महापंचायत की अध्यक्षता कपिलदेव यादव ने की और संचालन दीपक कुमार ने किया।