छठ से पहले तिलाबे नदी में फिर मचेगा खर्च का खेल, कचरे का ढेर बनी नदी
सहरसा की तिलाबे नदी को सफाई एजेंसी ने डंपिंग जोन बना दिया है। छठ से पहले नदी साफ करने के लिए लाखों का अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा।

सहरसा जिले के सोनवर्षाराज नगर पंचायत में सफाई व्यवस्था के नाम पर एक गंभीर लापरवाही सामने आई है। लोक पर्व छठ के पावन अवसर पर जब नदी के घाटों को स्वच्छ होना चाहिए, तब तिलाबे नदी को सफाई एजेंसी ने कचरे का डंपिंग जोन बना दिया है। इस लापरवाही का नतीजा यह है कि अब छठ से पहले नदी की सफाई के लिए नगर प्रशासन को फिर से लाखों रुपये खर्च करने की नौबत आ गई है।
पहले गंदगी, फिर सफाई का दोहरा खेल
नगर पंचायत की साफ-सफाई व्यवस्था आउटसोर्सिंग के माध्यम से संचालित की जा रही है। आरोप है कि सफाई का जिम्मा संभालने वाली एजेंसी पूरे नगर पंचायत के मोहल्लों और टोलों से कूड़ा इकट्ठा करती है, लेकिन उसे सही जगह निस्तारण करने के बजाय सीधे तिलाबे नदी में फेंक देती है।
इससे एक अजीब चक्र बन गया है: पहले नदी को कचरे से भरकर गंदा किया जाता है और फिर छठ जैसे त्योहारों के समय उसी कचरे को हटाने के लिए सरकारी धन का उपयोग किया जाता है। यदि नदी के आसपास नियमित सफाई होती और उसे डंपिंग एरिया न बनाया जाता, तो आज यह अनावश्यक खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती।
करोड़ों का बजट और वित्तीय अनियमितता की आशंका
इस पूरे मामले में वित्तीय अनियमितता के गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि सफाई का जिम्मा संभालने वाली एजेंसी को सालाना लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है। एजेंसी का मुख्य काम शहर के कचरे का प्रबंधन करना है, लेकिन शहर का टनों कचरा नदी के बहाव क्षेत्र में डाल दिया जाता है।
एक ही कार्य पर बार-बार होने वाला यह दोहरा खर्च सरकारी राशि के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है। नियमों के अनुसार, नदी और जलस्रोतों में कचरा डालना पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण कानूनों के तहत एक दंडनीय अपराध है।
प्रशासनिक रुख और विरोधाभास
एक तरफ सरकार 'गंगा उत्सव 2026' के माध्यम से नदियों की स्वच्छता और लोगों को जागरूक करने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर तिलाबे नदी की यह दुर्दशा प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाती है।
इस मामले पर नगर पंचायत सोनवर्षाराज के ईओ नवीन कुमार का कहना है कि नगर प्रशासन केवल जेसीबी का खर्च वहन कर रहा है।