ट्रंप-शी मुलाकात: क्या बदल जाएगी वैश्विक राजनीति? मिनरल्स, चिप्स और ट्रेड पर होगी महाचर्चा

Ghazala Saheb23 September 20263 min read1 viewBihar
ट्रंप-शी मुलाकात: क्या बदल जाएगी वैश्विक राजनीति? मिनरल्स, चिप्स और ट्रेड पर होगी महाचर्चा

अमेरिका और चीन के बीच होने वाली आगामी मुलाकात दुनिया भर के कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। जेएनयू (JNU) के चीनी अध्ययन के प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली यह बैठक 'रचनात्मक रणनीतिक स्थिरता' (Constructive Strategic Stability) की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।

रणनीतिक स्थिरता: प्रतिस्पर्धा से सहयोग की ओर?

प्रोफेसर कोंडापल्ली का मानना है कि ट्रंप प्रशासन अब चीन के साथ संबंधों में केवल प्रतिस्पर्धा के बजाय स्थिरता लाने की नीति अपना रहा है। जहाँ पहले चीन को एक शुद्ध रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जाता था, वहीं अब अमेरिका का लक्ष्य द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐसी स्थिरता लाना है जिससे तनाव कम हो सके। यह बदलाव वैश्विक स्तर पर चल रहे रूस-यूक्रेन संघर्ष, गाजा और ईरान जैसे संवेदनशील मुद्दों के बीच देखा जा रहा है।

इन 4 बड़े मुद्दों पर टिकी हैं सबकी नजरें

इस उच्च स्तरीय बैठक में कुछ ऐसे विषय हैं जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीक की दिशा तय करेंगे:

  • महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals): दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत महत्वपूर्ण खनिजों पर चीन का दबदबा है। अमेरिका के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता इन खनिजों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना होगी।
  • सेमीकंडक्टर और चिप्स: चर्चा का एक बड़ा हिस्सा सेमीकंडक्टर तकनीक पर होगा। संभावना है कि ट्रंप प्रशासन बाइडेन युग के दौरान लगाए गए चिप प्रतिबंधों में कुछ ढील दे सकता है।
  • व्यापार असंतुलन: अमेरिका और चीन के बीच करीब 8.9 ट्रिलियन डॉलर का भारी व्यापार घाटा है। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि चीन अमेरिकी उत्पादों, जैसे कि सोयाबीन, का आयात बढ़ाए और अमेरिका में निवेश करे।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): तकनीक की इस नई दौड़ में AI का मुद्दा भी बातचीत के प्रमुख एजेंडे में शामिल रहेगा।

पश्चिम एशिया का संकट और चीन की भूमिका

बैठक में केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी गहन चर्चा होने की उम्मीद है। प्रोफेसर कोंडापल्ली ने संकेत दिया कि ट्रंप प्रशासन चीन से यह अपेक्षा कर सकता है कि वह ईरान के साथ खुफिया जानकारी या उपकरण साझा करने जैसे कार्यों में संलिप्त न हो। अमेरिका चाहता है कि चीन पश्चिम एशिया के संघर्षों को बढ़ाने के बजाय समाधान का हिस्सा बने।

"ट्रंप प्रशासन का सुझाव है कि चीन को ईरान संघर्ष में टकराव बढ़ाने के बजाय समाधान का हिस्सा बनना चाहिए।"

इसके अलावा, पाकिस्तान और चीन द्वारा प्रस्तावित पांच सूत्रीय प्रस्ताव भी पश्चिम एशिया के समाधान के रूप में चर्चा में आ सकता है।

अन्य वैश्विक मुद्दे जो हो सकते हैं चर्चा का विषय

द्विपक्षीय व्यापार के अलावा, बैठक में कई अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक विषयों पर भी बात होने की संभावना है:

  • ऊर्जा सुरक्षा: चीन की आयातित ऊर्जा पर निर्भरता को देखते हुए यह एक बड़ा विषय होगा।
  • क्षेत्रीय स्थिरता: ताइवान का मुद्दा और दक्षिण चीन सागर की स्थिति।
  • अन्य: उत्तर कोरिया का मामला और अंतरिक्ष (Space) से जुड़े महत्वपूर्ण विषय।

कुल मिलाकर, यह मुलाकात दुनिया की दो महाशक्तियों के बीच एक नए 'G2' युग की शुरुआत या कम से कम एक अधिक अनुमानित और स्थिर रिश्ते की नींव रख सकती है।

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