यूपीआई एमडीआर चार्ज ग्राहकों से वसूलना कानूनन अपराध, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का बड़ा बयान

नई दिल्ली। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने डिजिटल भुगतान शुल्कों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच स्पष्ट किया है कि यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी यूपीआई के जरिए होने वाले लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट या एमडीआर की लागत को ग्राहकों पर थोपने की कोई भी कोशिश कानून का उल्लंघन होगी और यह एक आपराधिक अपराध माना जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मर्चेंट द्वारा 0.4 प्रतिशत एमडीआर ट्रांजैक्शन फीस को अंतिम उपयोगकर्ताओं यानी ग्राहकों पर स्थानांतरित किए जाने की आशंका जताई जा रही थी। सरकार ने साफ किया है कि नागरिकों पर ऐसा कोई भी शुल्क लगाने की न तो सिफारिश की गई है और न ही इसकी अनुमति दी गई है।
आम जनता के हितों की रक्षा
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ग्राहकों पर इस तरह का कोई भी शुल्क लगाने की कोई सिफारिश नहीं है और ऐसा करना कानून का उल्लंघन और एक आपराधिक अपराध है। केंद्र सरकार आम जनता के हितों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है ताकि उपभोक्ता डिजिटल भुगतान के लेन-देन की लागत से पूरी तरह सुरक्षित रहें। सिंधिया ने पुष्टि करते हुए कहा कि यह कभी भी ग्राहक या आम आदमी पर नहीं थोपा जाएगा और इसे हमारे उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता है।
राहुल गांधी का बयान और सरकार का स्पष्टीकरण
केंद्रीय मंत्री की ये टिप्पणियां लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए गए उस आरोप के तुरंत बाद आई हैं जिसमें उन्होंने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी दबाव के आगे झुकते हुए यूपीआई पर टैक्स लगा दिया है। राहुल गांधी ने एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री से यूपीआई टैक्स वापस लेने की मांग की थी। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि एमडीआर न तो कोई टैक्स है और न ही एकत्र किया गया शुल्क है, बल्कि इसे बैंक और भुगतान ऐप प्रदाताओं सहित भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के प्रतिभागियों के बीच वितरित किया जाता है ताकि यूपीआई इकोसिस्टम का संचालन और विस्तार जारी रह सके।
नया एमडीआर ढांचा और नियम
नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया या एनपीसीआई ने मंगलवार को एक नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट ढांचा पेश किया है। 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत का एमडीआर लगेगा, जबकि उपभोक्ता यूपीआई का उपयोग करके पूरी तरह से मुफ्त में लेनदेन करना जारी रखेंगे। संशोधित यूपीआई एमडीआर ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा और चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन पर लागू होगा। नए ढांचे के तहत 2,000 रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट या पी2एम यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत का एमडीआर लागू होगा, जिसमें प्रति लेनदेन एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। सरकार ने कहा है कि नए यूपीआई ढांचे का किसी भी पर्सन-टू-पर्सन लेनदेन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सभी पर्सन-टू-पर्सन लेनदेन के लिए यूपीआई पूरी तरह से मुफ्त रहेगा, चाहे स्थानांतरित राशि कितनी भी हो। लगभग 96 प्रतिशत सभी पी2एम लेनदेन इससे अप्रभावित रहेंगे और एमडीआर केवल 2,000 रुपये से अधिक के निर्दिष्ट मर्चेंट लेनदेन पर ही लागू होगा।