यूपीआई एमडीआर पर भारी राजनीतिक घमासान, केंद्र सरकार ने कहा- ग्राहकों से वसूली करना गैरकानूनी और आपराधिक अपराध

Ghazala Saheb16 September 20263 min read11 viewsBihar
यूपीआई एमडीआर पर भारी राजनीतिक घमासान, केंद्र सरकार ने कहा- ग्राहकों से वसूली करना गैरकानूनी और आपराधिक अपराध

नई दिल्ली। संशोधित यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर ढांचे को लेकर राजनीतिक घमासान मच गया है। केंद्र सरकार का कहना है कि डिजिटल भुगतान नागरिकों के लिए पूरी तरह से मुफ्त है। सरकार ने चेतावनी दी है कि व्यापारियों द्वारा एमडीआर शुल्क ग्राहकों पर थोपना अवैध और एक आपराधिक अपराध है। वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने इस कदम को विश्वासघात और यूपीआई टैक्स करार दिया है। विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार ने विदेशी भुगतान कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए अमेरिकी दबाव के आगे घुटने टेक दिए हैं। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम सिंधिया ने बुधवार को स्पष्ट किया कि व्यापारियों द्वारा ग्राहकों से यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर का शुल्क वसूलने का कोई भी प्रयास कानून का उल्लंघन होगा और यह एक आपराधिक अपराध होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने नागरिकों पर ऐसा कोई शुल्क लगाने की न तो सिफारिश की है और न ही इसकी अनुमति दी है।

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे का केंद्र पर बड़ा हमला

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी दबाव के कारण लेट गए हैं और यूपीआई पर टैक्स लगा दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो संदेश में राहुल गांधी ने कहा कि मोदी जी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने सीधे लेटने का फैसला किया है। उन्होंने हर भारतीय नागरिक पर यूपीआई पर टैक्स लगाकर टैक्स लाद दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी एमडीआर के मुद्दे पर केंद्र सरकार की निंदा करते हुए इसे सरकार की कमजोरी करार दिया। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि टैरिफ और व्यापार से लेकर एच-1बी वीजा और डिजिटल भुगतान तक, वाशिंगटन से लगातार दबाव बढ़ रहा है और सरकार लगातार समर्पण कर रही है।

जयराम रमेश और रणदीप सिंह सुरजेवाला के आरोप

राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र ने यूपीआई लेनदेन पर जीरो एमडीआर खत्म करके अमेरिकी दबाव के आगे घुटने टेक दिए हैं। जयराम रमेश ने दावा किया कि अमेरिका एक ऐसा बिल ला रहा है जो भारतीय निर्यात पर भारी व्यापार शुल्क लगाता है और भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए वीजा नियम सख्त करता है। कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 14 सितंबर को डिजिटल पलटाव के दिन के रूप में याद किया जाएगा। सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का निर्णय आम नागरिकों के साथ विश्वासघात है।

केंद्र सरकार और एनपीसीआई का नया एमडीआर ढांचा

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि एमडीआर न तो कोई टैक्स है और न ही सरकार द्वारा एकत्र किया जाने वाला कोई शुल्क है। यह यूपीआई इकोसिस्टम के संचालन और विस्तार के लिए बैंकों और भुगतान ऐप प्रदाताओं सहित भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के प्रतिभागियों के बीच वितरित किया जाता है। नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई ने मंगलवार को नया एमडीआर ढांचा पेश किया। इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई मर्चेंट लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगेगा, जबकि उपभोक्ता यूपीआई का उपयोग करके पूरी तरह से मुफ्त में लेनदेन करना जारी रखेंगे। संशोधित यूपीआई एमडीआर ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा और यह चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन पर ही लागू होगा। नए ढांचे के तहत 2,000 रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा, जिसमें प्रति लेनदेन एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। सरकार ने दोहराया है कि नए यूपीआई ढांचे का किसी भी पर्सन-टू-पर्सन लेनदेन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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