वैशाली में दर्दनाक हादसा: गंगा में नाव पलटने से 13 बच्चों की मौत

बिहार के वैशाली जिले से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां गंगा नदी में एक निजी नाव के डूबने से 13 मासूम बच्चों की मौत हो गई। यह हादसा रामपुर श्यामचंद गांव के पास हुआ, जब एक क्षमता से अधिक सवारियां ले जा रही नाव अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। मृतकों की उम्र 15 वर्ष या उससे कम बताई जा रही है।
कैसे हुआ यह भीषण हादसा?
मिली जानकारी के अनुसार, यह हादसा 13 अक्टूबर की रात करीब 8:30 बजे हुआ। नाव में सवार लोग गांव में आयोजित एक दावत में शामिल होने जा रहे थे। स्थानीय प्रशासन और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, नाव की क्षमता महज 6 लोगों की थी, लेकिन सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर उसमें लगभग 20 से 25 यात्री सवार थे।
अंधेरा होने और नाव पर क्षमता से कई गुना अधिक बोझ होने के कारण संतुलन बिगड़ गया और नाव डूबने लगी। चूंकि अधिकांश बच्चे तैरना नहीं जानते थे, इसलिए वे डूबने से खुद को बचा नहीं सके। स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया, जिसके बाद राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और स्थानीय गोताखोरों ने नाव को पानी से बाहर निकाला।
7 बच्चों का हुआ सफल रेस्क्यू
वैशाली की जिला मजिस्ट्रेट वर्षा सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हादसे में 7 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। इन जीवित बचे लोगों को तत्काल उपचार के लिए पटना के NMCH अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि क्या नाव के मालिक के पास परिचालन के लिए आवश्यक सुरक्षा प्रमाणपत्र थे या नहीं।
सरकार ने किया मुआवजे का ऐलान
इस बड़ी त्रासदी पर राज्य और केंद्र सरकार ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने के लिए निम्नलिखित घोषणाएं की गई हैं:
- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी: प्रत्येक मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष के माध्यम से मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी।
इस दुखद घड़ी में राजद नेता तेजस्वी यादव सहित कई अन्य राजनीतिक नेताओं ने भी प्रशासन से बचाव कार्यों और उचित मुआवजे के संबंध में संपर्क किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी शोक संवेदना व्यक्त की है।
नदी यात्रा में सुरक्षा पर उठते सवाल
यह हादसा बिहार में नदी परिवहन के दौरान होने वाली असुरक्षा को एक बार फिर उजागर करता है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, 2012 से 2021 के बीच बिहार में नाव डूबने से 421 मौतें दर्ज की गई हैं, जो देश की कुल मौतों का लगभग 12 प्रतिशत है।
"यह हादसा निजी नावों के अनियंत्रित संचालन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का परिणाम है। दीयारा क्षेत्रों में जहां परिवहन के अन्य साधन सीमित हैं, वहां इन अनौपचारिक नावों पर निर्भरता जानलेवा साबित हो रही है।"
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की ढिलाई और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाओं की कमी के कारण शुरुआती राहत कार्यों में काफी कठिनाई हुई। अब देखना यह होगा कि क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नावों के पंजीकरण और क्षमता के नियमों को कड़ाई से लागू किया जाता है या नहीं।