सुपौल: हाथ पर कलश रखकर 9 दिनों से कठिन व्रत, महिला की बिगड़ी तबीयत

बिहार के सुपौल जिले से आस्था और स्वास्थ्य के बीच एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। त्रिवेणीगंज में मां दुर्गा की भक्ति में लीन एक महिला की तबीयत अचानक बिगड़ने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। यह महिला पिछले नौ दिनों से बिना अन्न ग्रहण किए, अपने दाहिने हाथ पर कलश रखकर कठिन पूजा-अर्चना कर रही है।
आस्था और स्वास्थ्य के बीच छिड़ी जंग
कुशहा वार्ड सात की निवासी गुड्डी देवी पिछले 11 अक्टूबर से मेला मैदान स्थित दुर्गा मंदिर में कलश स्थापना कर पूजा कर रही हैं। उनकी यह तपस्या इतनी कठिन है कि उन्होंने नौ दिनों से अन्न का एक दाना भी नहीं खाया है और लगातार अपने दाहिने हाथ पर कलश को संतुलित रखा है।
शुक्रवार को जब उनकी स्वास्थ्य जांच की गई, तो स्थिति काफी चिंताजनक पाई गई। जांच के दौरान पाया गया कि उनका रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) असामान्य है और उनकी नाड़ी तथा हृदय गति में भी काफी गड़बड़ी है।
डॉक्टरों की गंभीर चेतावनी
अनुमंडलीय अस्पताल के अधीक्षक डॉ. उमेश कुमार ने बताया कि गुड्डी देवी पहले से ही हृदय रोग से पीड़ित हैं। डॉक्टरों ने जांच के बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित बातें कही हैं:
- व्रत के कारण दवाइयां बंद रखना महिला के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
- उनकी वर्तमान शारीरिक स्थिति को देखते हुए तत्काल इलाज की सख्त आवश्यकता है।
- डॉक्टरों ने परिजनों को सलाह दी है कि वे महिला का व्रत समाप्त कराकर जरूरी दवाइयां शुरू करवाएं।
"हृदय रोग की स्थिति में बिना चिकित्सकीय सलाह के उपवास जारी रखना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।" — स्वास्थ्य विभाग
पिता की सेहत के लिए मांगी थी मन्नत
गुड्डी देवी की इस कठिन तपस्या के पीछे एक भावुक कारण है। उन्होंने अपने पिता, वासुदेव सरदार की सेहत के लिए यह मन्नत मांगी थी। कुछ समय पहले वासुदेव सरदार को लकवा (पैरालिसिस) का दौरा पड़ा था, जिसके बाद वे चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हो गए थे।
महिला के अनुसार, मन्नत मांगने के चार-पांच दिन बाद ही उनके पिता की स्थिति में सुधार होने लगा था। इसी चमत्कारिक सुधार के बाद, उन्होंने नवरात्र के दौरान नौ दिनों तक बिना अन्न के हाथ पर कलश रखकर पूजा करने का संकल्प लिया था।
परिजनों का रुख और प्रशासन की कोशिश
भले ही स्वास्थ्य विभाग की टीम उन्हें समझाने का लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन गुड्डी देवी और उनके परिजन फिलहाल व्रत तोड़ने या इलाज कराने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका अटूट विश्वास है कि मां दुर्गा उनकी रक्षा करेंगी और उनकी मन्नत पूरी होगी। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार उन्हें यह समझाने की कोशिश कर रही है कि बिना डॉक्टरी सलाह के उपवास करना जानलेवा हो सकता है।