गांधी और शास्त्री को योगी का नमन, खादी पर दी बड़ी खुशखबरी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री ने देश की आजादी में इन महापुरुषों के योगदान को याद किया और प्रदेश के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की।
स्वदेशी और स्वावलंबन का मंत्र
महात्मा गांधी को याद करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बापू का स्वदेशी और स्वावलंबन का संदेश ही भारत की स्वतंत्रता संग्राम का सबसे बड़ा मंत्र बना। उन्होंने कहा कि गांधीजी के नेतृत्व में ही बिखरा हुआ स्वतंत्रता आंदोलन एक विशाल जन आंदोलन में बदल गया, जिसने ब्रिटिश शासन को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'लोकल टू ग्लोबल' विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधीजी के स्वावलंबन के विचार ही विकसित भारत की नींव बनेंगे। उन्होंने अपील की कि हमें अपने गांवों और गलियों में बने हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना चाहिए।
खादी प्रेमियों के लिए बड़ी राहत
गांधी जयंती के इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने खादी को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार गांधी जयंती को खादी के प्रचार के साथ मना रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार:
- 30 जनवरी 2027 तक खादी के कपड़ों पर 25 प्रतिशत की छूट उपलब्ध रहेगी।
- सरकार का लक्ष्य खादी को जन-जन के जीवन का हिस्सा बनाना है।
योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे हमारे कारीगरों और बुनकरों के कौशल का सम्मान करें और खादी को अपनाएं।
शास्त्री जी की सादगी और 'जय जवान जय किसान'
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने उनकी सादगी और अटूट संकल्प की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी का व्यक्तित्व जितना सरल था, वह उतना ही मजबूत और लचीला भी था।
"शास्त्री जी ने वही किया जो उन्होंने कहा और वही कहा जो उन्होंने किया। उन्होंने देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाने का जो लक्ष्य रखा था, वह आज भारत की शक्ति बन चुका है।"
मुख्यमंत्री ने उनके प्रसिद्ध नारे 'जय जवान जय किसान' का जिक्र करते हुए कहा कि जहाँ एक ओर हमारे सैनिक सीमाओं पर दुश्मनों से लोहा ले रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हमारे मेहनती किसान पसीना बहाकर देश को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बना रहे हैं।