शहीद भगत सिंह की जयंती पर बोले सीएम योगी: साहस और देशभक्ति से लें प्रेरणा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह की 119वीं जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने देश के युवाओं से आह्वान किया कि वे भगत सिंह के अदम्य साहस और अटूट देशभक्ति से प्रेरणा लें और एक ज्ञानवान, मूल्य-आधारित और सक्षम उत्तर प्रदेश के निर्माण में अपना योगदान दें।
युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' के माध्यम से अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मात्र 23 वर्ष की अल्पायु में अमर शहीद भगत सिंह ने मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। उन्होंने कहा, "मेरे सम्मानित साथी नागरिकों, भगत सिंह की जयंती हम सभी के लिए अपने संकल्प को दोहराने का एक अवसर है, ताकि हम राष्ट्रीय कर्तव्य को सर्वोपरि रख सकें।"
सीएम योगी ने युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि हमें भगत सिंह के जीवन से सीख लेकर जातिवाद, नशे और अन्य सामाजिक बुराइयों की बेड़ियों को तोड़ना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि ज्ञान को अपनी शक्ति बनाना चाहिए और सीखने की ललक को हमेशा जीवित रखना चाहिए।
शिक्षा और कौशल विकास पर जोर
मुख्यमंत्री ने राज्य के विकास के लिए शिक्षा और कौशल विकास की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब युवा अपने ज्ञान को कौशल से, कौशल को संकल्प से और संकल्प को क्रियान्वयन से जोड़ेंगे, तो यह उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा को एक नई गति प्रदान करेगा। उन्होंने एक ऐसे उत्तर प्रदेश के निर्माण का आह्वान किया जो ज्ञान और मूल्यों से समृद्ध हो।
कौन थे अमर शहीद भगत सिंह?
शहीद भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को हुआ था। वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारियों में से एक थे। उनके जीवन के कुछ प्रमुख पड़ाव इस प्रकार हैं:
- असेंबली बम कांड: 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने ब्रिटिश शासन के दमनकारी कानूनों के विरोध में दिल्ली की सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली में बम फेंके थे।
- राजनीतिक संदेश: उन्होंने जानबूझकर आत्मसमर्पण किया ताकि अदालत के माध्यम से ब्रिटिश शासन के खिलाफ अपना राजनीतिक संदेश फैला सकें।
- बलिदान: उन्हें लाहौर षड्यंत्र मामले में दोषी ठहराया गया और 23 मार्च 1931 को राजगुरु और सुखदेव के साथ उन्हें फांसी दे दी गई।
उस समय भगत सिंह की आयु मात्र 23 वर्ष थी, लेकिन उनका बलिदान आज भी करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।